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धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishta nakshatra) में पैदा हुए लोग कैसे होते हैं और क्या हैं इनके सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष।

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ब्रह्मांड में उपस्थित 27 नक्षत्रों में से 23 वें स्थान पर धनिष्ठा नक्षत्र आता है। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है और इस नक्षत्र के प्रथम दो चरणों में पैदा हुए लोगों की राशि मकर होती है तथा अंतिम दो चरणों में पैदा हुए लोगों की राशि कुंभ होती है, जिनके स्वामी ग्रह शनि है। इस प्रकार इन जातकों पर जीवन पर्यंत मंगल एवं शनि ग्रह का प्रभाव रहता है। इस नक्षत्र का वृक्ष ‘शमी का पेड़’ है। धन से संबंधित क्षेत्र के लिए यह नक्षत्र अत्यंत शुभ माना गया है। आइए जानते हैं कैसे होते हैं धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishta nakshatra) में पैदा हुए लोग।

धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishta nakshatra) में पैदा हुए लोगों का व्यक्तित्व एवं स्वभाव

धनिष्ठा नक्षत्र में पैदा हुए लोग काफी हंसमुख एवं मिलनसार होते हैं। ये अकेले रहना पसंद नहीं करते हैं। ये बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं तथा हर काम में दक्ष होते हैं। ये किसी भी परिस्थिति में अपने आप को ढालने में सक्षम होते हैं। ये दिखने में आकर्षक होते हैं और अपनी हाजिर जवाबी के कारण भीड़ में अपना स्थान जल्दी ही बना लेते हैं। ये काफी धार्मिक प्रवृत्ति के भी होते हैं तथा पूजा-पाठ आयोजन में काफी दिलचस्पी लेते हैं। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल होने के कारण ये काफी स्पष्टवादी भी होते हैं और कोई भी गलत चीज इन्हें बर्दाश्त नहीं होती है। कई बार इनका क्रोध इन पर हावी हो जाता है, जिससे इन्हें हानि भी उठानी पड़ जाती है।

धनिष्ठा नक्षत्र (dhanishtha nakshatra) में पैदा हुए लोगों की शिक्षा व कॅरियर

धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishta nakshatra) में पैदा हुए लोग बहुत ही महत्वकांक्षी होते हैं। ये दिमागी रूप से बहुत तेज होते हैं इसलिए शिक्षा, कैरियर व व्यापार में ये हमेशा अव्वल रहते हैं। ये विज्ञान और कला संकाय में विशेष तौर पर रुचि रखते हैं। इन विषयों में ये उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं और एक अच्छे कलाकार, गीतकार और वैज्ञानिक बनते हैं। ये स्वयं का व्यापार करने में भी विशेष रुचि रखते हैं और हार्डवेयर और तकनीकी चीजों से संबंधित व्यापार करते हैं। मंगल और शनि ग्रह का प्रभाव होने के कारण प्रॉपर्टी से संबंधित व्यवसाय भी इनके लिए बहुत लाभदायक होता है। ये अपना कॅरियर आध्यात्मिक क्षेत्रों में भी बनाना पसंद करते हैं। ये अच्छे आध्यात्मिक गुरु, ज्योतिषी एवं कथावाचक बन सकते हैं।

धनिष्ठा नक्षत्र में पैदा हुए लोगों का पारिवारिक एवं वैवाहिक जीवन

धनिष्ठा नक्षत्र में पैदा हुए लोगों का पारिवारिक जीवन सुखमय होता है। इन्हें अपने भाई बहनों से विशेष लगाव होता है। ये अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं और इन्हें अपने माता-पिता से अच्छी संपत्ति प्राप्त हो सकती है। व्यापार या शिक्षा के लिए इन्हें अपने परिवार को छोड़ना भी पड़ता है, परंतु ये अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभाते हैं। इनका वैवाहिक जीवन भी सुखमयी होता है तथा जीवनसाथी बहुत भाग्यशाली होता है। हालांकि इन्हें ससुराल पक्ष से ज्यादा लाभ नहीं मिलता, परंतु अपने जीवनसाथी के साथ इनके संबंध हमेशा मधुर रहते हैं। इनका जीवनसाथी अधिक खर्चीला हो सकता है, परंतु विवाह के बाद इनकी आर्थिक उन्नति भी होती है। संतान पक्ष की ओर से भी धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishta nakshatra) के लोग भाग्यशाली होते हैं।

धनिष्ठा नक्षत्र में पैदा हुए लोगों की जीवन शैली

धनिष्ठा नक्षत्र में पैदा हुए लोगों को कभी धन की कमी नहीं रहती है। यह नक्षत्र धन से संबंधित है और इस नक्षत्र में पैदा हुए लोग किसी ना किसी प्रकार से जीवन में अच्छा धन कमाते हैं। ये एक अच्छी लाइफ स्टाइल जीते हैं। इन्हें भूमि, भवन एवं वाहन जैसे सभी भौतिक सुख प्राप्त होते हैं और कभी सुख की कमी नहीं रहती है, लेकिन इनकी कुंडली में यदि मंगल और शनि की स्थिति खराब है तो इन्हें कई जगह से धन हानि भी हो सकती है। हालांकि इन्हें धन कमाने के कई तरीके आते हैं, परंतु फिर भी कुंडली में दोष होने पर इन्हें कष्टप्रद जीवन बिताना पड़ सकता है।

धनिष्ठा नक्षत्र में पैदा हुए लोगों के नकारात्मक पक्ष

धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishta nakshatra) में पैदा हुए लोगों की कुंडली में यदि मंगल खराब स्थिति में है तो ये काफी अड़ियल, क्रोधी, जिद्दी एवं खडूस स्वभाव के हो सकते हैं। इनका पारिवारिक एवं वैवाहिक जीवन काफी कष्टप्रद रह सकता है। कुंडली में शनि की स्थिति खराब हो तो इन्हें अकारण ही धन हानि होती है और ये अपना बचाया हुआ सारा धन अचानक गंवा बैठते हैं। कई बार ये स्वार्थी हो जाते हैं और इस चक्कर में समाज में अपनी छवि खराब कर बैठते हैं जिससे समाज इन्हें नकार देता है। नक्षत्र के बारे में और भी जानिए।

धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishta nakshatra) में पैदा हुए लोगों को बरतने वाली सावधानियां एवं उपाय

धनिष्ठा नक्षत्र में पैदा हुए लोगों को अपनी कुंडली में मंगल एवं शनि ग्रह के दोषों का निवारण अवश्य कराना चाहिए। इन्हें धैर्यवान होना चाहिए तथा अपने क्रोध पर नियंत्रण करना चाहिए। श्री हनुमान जी की आराधना इनके लिए अत्यंत फलदाई होती है। इन्हें मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी और शनिदेव की आराधना अवश्य करनी चाहिए। ‘शमी का पेड़’ धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishta nakshatra) का वृक्ष है, तो इस नक्षत्र में पैदा हुए लोगों को शमी के पेड़ को पानी देना चाहिए।

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